देहरादून। देहरादून मसूरी रोड पर अनंत नारायण महादेवन निर्देशित आगामी बॉलीवुड फ़िल्म “पास्ट टेंस” के सेट पर बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता परेश रावल से महानिदेशक सूचना और उत्तराखण्ड फ़िल्म विकास परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने मुलाक़ात की। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक सूचना और संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा नितिन उपाध्याय भी उपस्थित रहे। परेश रावल ने अभी तक अपने फ़िल्म करियर में 240 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया है और कई पुरस्कारों से सम्मानित हुए हैं। फ्लाइंग स्टोंस फ़िल्म के बैनर टेल बन रही फ़िल्म “पास्ट टेंस” जिसका निर्देशन अनंत नारायण महादेवन द्वारा किया जा रहा है। इस फ़िल्म के मुख्य किरदारों में परेश रावल, आदित्य रावल, आदिल हुसैन, शरीब हाशमी, तनिष्ठा चटर्जी, गगन देव रीआर, स्मिता ताम्बे, सतीश शर्मा और शरद्धा भट्ट अभिनय कर रहें हैं। यह फ़िल्म एक सोशल फ़ैमिली ड्रामा फ़िल्म है, जिसमें अधिक से अधिक से सपोर्ट क्रू स्थानीय स्तर से लिये लिया गया है।
महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया प्रदेश सरकार द्वारा पारित नई फ़िल्म नीति में फ़िल्मों के लिए पहले अधिक अनुदान की राशि को सम्मिलित किया गया है, ओटीटी प्लेटफ़ार्म पर रिलीज़ फ़िल्मों और वेब सीरीज को भी अनुदान हेतु सम्मिलित किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार सरकार फ़िल्म निर्माण से जुड़े प्रत्येक क्षेत्र के विकास के लिए पूर्णरूप से प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार फ़िल्म निर्माण से राज्य में प्रत्यक्ष रोज़गार की नयी गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही राज्य के पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर रही है। इस नयी पारित फ़िल्म पालिसी में उत्तराखंड के अनछुए शूटिंग डेस्टिनेशन को बढ़ावा देने का भी प्रावधान है। उत्तराखण्ड फ़िल्म विकास परिषद पर्यटन विभाग के सहयोग से नये शूटिंग डेस्टिनेशंस को भी लगातार चिन्हित करने का कार्य कर रही है ताकि राज्य में नये शूटिंग डेस्टिनेशंस को बढ़ावा मिले, और फिल्मों के माध्यम से उत्तराखंड के अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों का भी प्रचार हो सके।
मुलाक़ात के दौरान बातचीत में परेश रावल ने महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी को बताया कि अभी हाल ही में उन्होंने अपनी दो बॉलीवुड फ़िल्मो की शूटिंग उत्तराखण्ड में कम्प्लीट की है जिनका पोस्ट प्रोडक्शन का काम अभी चल रहा है और वो भी जल्द ही रिलीज़ होने की कगार पर हैं। राज्य में लागू हुई नयी फ़िल्म नीति की सारहना करते हुए करते हुए श्री रावल ने उत्तराखण्ड फ़िल्म विकास परिषद (न्थ्क्ब्) द्वारा लागू सिंगल विंडो सिस्टम को सराहते हुए बताया कि राज्य में सभी प्रकार की शूटिंग परमिशन प्रक्रिया के सरल से होने के कारण उत्तराखण्ड बॉलीवुड और देश के अन्य राज्यों के लिए संपूर्ण एक फ़िल्म फ्रेंडली डेस्टिनशन के रूप उभर रहा हैं।
उन्होंने कहा कि इस नयी नीति के अन्तर्गत फ़िल्म शूटिंग को बढ़ाने के लिए सभी पहलुओं पर बारीकी से काम किया गया है। हिन्दी और स्थानीय फ़िल्मों को बढ़े हुए अनुदान की व्यवस्था और ससमय निःशुल्क शूटिंग परमिशन मिलने के कारण बाहर से आने वाले फ़िल्मकारों को राज्य में अधिक से अधिक शूटिंग करने का प्रोत्साहन मिल रहा है, और बताया कि यहाँ स्थानीय लोगो द्वारा भी शूटिंग के दौरान हर प्रकार की सहायता भी मिलती जिससे राज्य को फ़िल्मों की शूटिंग के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद मिलती है। उनके अनुसार इस नई फिल्म नीति से फ़िल्म निर्माताओं में उत्साह का माहौल है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पिछले कुछ समय से फ़िल्म और वेब सीरीज शूटिंग में तेज़ी आयी है । अभी हाल ही में पिछले दिनों निर्माता निर्देशक विपुल शाह की एक कॉमेडी सस्पेंस फ़िल्म हिसाब का शूट कम्पलीट हुआ था। उससे पहले अनुपम खेर के बैनर “अनुपम खेर स्टूडियो” की फ़िल्म “तन्वी द ग्रेट” का शूट भी लैंसडौन में कैम्पलीट हुआ है। जिसकी शूटिंग यहाँ 36 दिनों तक कि गई है। राज शांडिल्य निर्देशित फ़िल्म “विकी विद्या का वो वाला वीडियो” की शूटिंग भी मार्च के महीने में कम्पलीट हुई है जिसमें मुख्य भूमिकाओं में राजकुमार राव और तृप्ति डिमरी हैं। इसके पहले काजोल और कृति सेनन अभिनीत “दो पत्ती” का शूट दिसम्बर माह में समाप्त हुआ था ।
संयुक्त निदेशक सूचना डा नितिन उपाध्याय ने बताया कि उत्तराखण्ड में शूट हुई “11 11” (ग्यारह-ग्यारह) वेब सीरिज़ ्रमम5 पर देखी जा सकती जिसमें उत्तराखण्ड के ही डांसिंग स्टार राघव जुयाल मुख्य किरदारों में शामिल है। ्रमम5 पर ही “रौतू का राज” फ़िल्म को भी देखा जा सकता है जिसमें मुख्य अभिनय नवाजुद्दीन सिद्धिकी ने किया है। वेब सीरिज़ “लाइफ हिल गई” को डिज़्नी हॉटस्टार पर देखा जा सकता है, जिसमें उत्तराखंड के बहुत से कलाकारों हो शामिल किया गया है। अमित सियाल द्वारा अभिनीत एक फ़िल्म जिसका नाम “तिकड़म” जियो सिनेमा प्रीमियम पर इसी माह 23 अगस्त को रिलीज़ हुई है। प्रदेश में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी स्थानीय भाषाओं की फ़िल्मों की शूटिंग की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अभी पिछले कुछ महीनों में उत्तराखंड की क्षेत्रीय बोली में बनी गढ़वाली फ़िल्में मीठी, असगार, शहीद, संस्कार भी रिलीज़ हुईं है जिनको उत्तराखंड में और राज्य के बाहर के दर्शकों द्वारा काफ़ी सराहा जा रहा है।
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फिल्म अभिनेता परेश रावल ने महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी से की मुलाक़ात
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एस.पी. ममगाईं ने मनोहर लाल जुयाल को भेंट की पुस्तकें
देहरादून। मेघदूत नाट्य संस्था के संस्थापक और प्रख्यात रंगकर्मी एस.पी. ममगाईं ने अपने लिखे नाटकों की दो पुस्तकें माया देवी यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट मनोहर लाल जुयाल को भेंट करते हुए अपेक्षा व्यक्त की है कि रंगमंच की विधा के इच्छुक छात्र छात्राओं से इनका मंचन कराएं।
श्री ममगाई ने चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी और उत्तराखंड के दो ऐतिहासिक कथानकों पर इन आधारित इन नाटकों को बहुत लम्बे शोध के बाद लिखा है। इनमें एक नाटक 17वीं शताब्दी की अद्वितीय शौर्य तथा पराक्रम का प्रदर्शन कर मातृभूमि की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली उत्तराखंड की जॉन ऑफ आर्क अथवा झांसी की रानी की तरह बहादुर तीलू रोतेली के अद्भुत पराक्रम पर केंद्रित है और दूसरा नाटक तैडी गढ़ की तिलोगा तथा भरपूर गढ़ के राजकुमार अमर देव सजवाण के प्रणय प्रसंग पर आधारित है। तीलू रौतेली नाटक का एक से अधिक बार मंचन हो चुका है जबकि तिलोगा तथा अमर देव सजवाण के जीवन वृत्त पर आधारित नाटक का जल्द मंचन होने जा रहा है। आजकल इस नाटक की रिहर्सल चल रही है और शीघ्र ही राजधानी देहरादून में इसका मंचन होगा। श्री जुयाल ने ममगाई के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि रंगकर्म अपने आप में बड़ी साधना है और इसके जरिए नई पीढ़ी को इतिहास की सम्यक जानकारी मिलती है। उन्होंने श्री ममगाई के दीर्घ जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनसे समाज को अभी बहुत कुछ पाना है। इस अवसर पर मेघदूत नाट्य मंच के आरसी मिश्रा, दिनेश शास्त्री और सक्षम जुयाल मौजूद थे। -

बच्चों को बताया साफ स्वच्छ रहना क्यों जरूरी
देहरादून। भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा के तहत सोमवार को राजकीय जूनियर हाई स्कूल, नकरौंदा में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन उप महानिदेशक संतोष तिवारी के मार्गदर्शन में किया गया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण और स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया और छात्रों को इन विषयों पर जागरूक किया गया। कार्यक्रम में एआईजी नीलिमा शाह, वैज्ञानिक ई डॉ. आशीष कुमार और उप निदेशक डॉ. विपिन गुप्ता ने महत्वपूर्ण सत्रों का संचालन किया। स्कूल के प्रधानाचार्य राकेश गौड़ सहित अन्य स्टाफ सदस्य गुरमीत कौर, दीपक रावत और विकास शाह भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
नीलिमा शाह ने जल संरक्षण पर जोर देते हुए इसे मानव जीवन के लिए अमूल्य संसाधन बताया। उन्होंने बताया कि पानी की बर्बादी रोकने और इसे संरक्षित करने के छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को व्यक्तिगत स्वच्छता और शरीर की सफाई के महत्व के बारे में भी बताया, जिससे न केवल बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि एक स्वस्थ जीवन की ओर भी अग्रसर हुआ जा सकता है। डॉ. आशीष कुमार ने पर्यावरण में प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीरता पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग से होने वाले हानिकारक प्रभावों की जानकारी दी और छात्रों को इसके स्थान पर वैकल्पिक, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक का अपघटन बहुत धीमी गति से होता है, जिससे यह मिट्टी, जल और वातावरण को प्रदूषित करता है। इस समस्या को सुलझाने के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उप निदेशक डॉ. विपिन गुप्ता ने स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे सामाजिक और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने स्वच्छता पखवाड़ा के विभिन्न पहलुओं पर छात्रों के साथ बातचीत की और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन भी किया। प्रतियोगिता में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण-संरक्षण से जुड़े सवालों का उत्तर दिया। कार्यक्रम के अंत में छात्रों को नेल कटर वितरित किए गए, जिससे वे व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन कर सकें। ताजगी के लिए ताज़ा जूस और अन्य खाद्य पदार्थ वितरित किए गए, ताकि छात्रों को स्वस्थ जीवन शैली के प्रति प्रेरित किया जा सके। क्विज़ के विजेताओं को पौधे प्रदान किए गए, जिससे वे पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय रूप से योगदान दे सकें। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल छात्रों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना था, बल्कि उन्हें जीवन में स्वस्थ और टिकाऊ आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी था। इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों के बीच स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति समझ विकसित की जा सकती है, जो दीर्घकालिक रूप से समाज के लिए फायदेमंद साबित होगी। -

डीएम ने ईईएसएल से छिना स्ट्रीटलाइटों के मरम्मत एवं रखरखाव कार्य
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सम्पूर्ण व्यवस्था आंकलन के पश्चात अपने संकल्प को कायम रखते हुए शहर की स्ट्रीट लाईटों की मरम्मत की जिम्मेदारी अब नगर निगम को दे दी है,एक ही शाम में ईईएसएल से यह कार्य वापस लिया गया है जिसका आदेश जारी कर दिया गया है। नई लाईट लगाने का कार्य फिलहाल दिसम्बर 2024 तक ईईएसएल के पास ही रहेगा। बहरहॉल बैकअप में डीएम के निर्देशानुसार निगम नई लाईट/उपकरण का रेट कान्टेªक्ट भी करेगा।
नगर निगम देहरादून क्षेत्र में खराब बहुताधिक संख्या में खराब स्ट्रीटलाईट मरम्मत न होने की शिकायतें प्राप्त हो रही है, थी जिस पर सम्बन्धित कम्पनी द्वारा रिस्पांस न किये जाने पर इसका 3-4 हजार तक का बैकलॉग आ गया। जबकि अनुबन्ध के अनुसार कम्पनी को शिकायत प्राप्त होने के 48 घंटे के भीतर मरम्मत किये जाने का प्राविधान है। कम्पनी की कार्यप्रणाली को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सम्बन्धित कम्पनी के सीईओ को तलब करते हुए फटकार लगाई तथा विधिक कार्यवाही की चेतावनी जारी की। कम्पनी का कॉल सेन्टर, पैमेंट सेल, दून से सैकड़ो मील दूर दिल्ली में होने से कार्यों में पारदर्शिता न होने के कारण, व्यवस्था में सुधार नही आ रहा था तथा जिम्मेदारी व जवाबदेही नगर निगम की बन रही थी, जिससे आमजनमानस में नगर निगम की छवि खराब हो रही थी। डीएम ने व्यवस्था न सुधरने पर कम्पनी से मरम्मत कार्य वापस लेकर कर दिया एक ही दिन में निर्णय। स्ट्रीट लाइटों की खराबी की शिकायतों के बैकलॉग को शीघ्रातिशीघ्र निस्तारित करने को नगर निगम परिसर से 35 टीमे मयवाहन रोस्टरवार वार्ड में जाकर स्ट्रीट लाईटें की मरम्मत कार्य करेंगी।टीमों की प्रतिदिन प्रातः एवं कार्य निष्पादन के बाद वापस नगर निगम परिसर में एकत्रित होंगी सभी टीमें- लगेगी हाजरी होगी। -

उपनल कर्मियों के साथ सरकार का दोहरा मापदंड ठीक नहीं
देहरादून। उपनल महासंघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रदीप सिंह चौहान ने सरकार पर उपनल कर्मियों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश भर में उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कई वर्षाे से अपनी सेवाएं दे रहे लगभग 22 हजार कर्मचारियों के साथ सरकार का दोहरा मापदंड उनके भविष्य के लिए ठीक नहीं है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2018 में प्रदेश सरकार को उपनल कर्मचारी के चरणबद्ध नियमितीकरण वह समान कार्य के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था, किंतु सरकार द्वारा इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई। सुप्रीम कोर्ट में मामले को लगभग 6 वर्ष होने को है लेकिन वहां से अभी तक कोई फैसला न आने से उपनल कर्मियों के हाथ निराशा लगी है।
इतना ही नहीं प्रदेश सरकार ने बाकायदा उपनल कर्मियों को न हटाए जाने का शासन आदेश जारी भी किया गया, बावजूद उसके कई विभागों से उपनल कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई। ताजा मामला उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय का है जहां 44 उपनल कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जब कार्मिक उच्च न्यायालय की शरण में गए तब न्यायालय द्वारा विश्वविद्यालय को हटाएंगे 44 कर्मियों की पुर्ननियुक्ति के आदेश दिए गए, इस आदेश की अवमानना करते हुए विश्वविद्यालय ने मात्र 19 कार्मिकों की पुनर्नियुक्ति की जबकि 25 कार्मिकों की सेवाएं फिर भी बहाल नहीं की गई। इन दिनों हरिद्वार का भी एक मामला सामने आया जहां विधिक सेवा प्राधिकरण न्याय विभाग से एक कार्मिक की सेवाएं समाप्त कर दी गई।
सरकार कहीं संविदा कर्मचारियों के नियमित कारण की बात कर रही है, तो कहीं उपनल से तैनात कार्मिकों की सेवाएं यथावत बनाए रखने का शासनादेश जारी करती है, तो वहीं दूसरी ओर कई विभागों से उपनल कार्मिकों की सेवाएं समाप्त कर उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, सरकार का ऐसा दोहरा मापदंड उपनल कार्मिकों के भविष्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
इन दिनों प्रदेश सरकार संविदा कर्मियों को नियमितीकरण की बात कर रही है, लेकिन सरकार द्वारा यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि इस संविदा नियमितीकरण में उपनल, पीआरडी एवं अन्य माध्यमों से लगे कार्मिक सम्मिलित नहीं है। जब प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण उपक्रम उपनल और पीआरडी के माध्यम से तैनात कार्मिक संविदा कर्मचारी की श्रेणी में नहीं है तो वह कौन संविदा कर्मचारी हैं जिनको सरकार नियमित करने की बात कह रही है?
विभिन्न विभागों में अपने जीवन के 18 से 20 वर्ष की सेवाएं देने के बाद उपनल कर्मी आज अपने सुरक्षित भविष्य की गुहार सरकार से लगा रहे हैं। कई बार सरकार से मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट के निर्देशानुसार कार्मिकों का नियमितीकरण और समान कार्य समान वेतन दिया जाए। कार्मिकों के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है, नतीजन अब आर-पार की लड़ाई को उपनल कर्मचारी तैयार हो चुके हैं। प्रदेश के शासकीय कार्यों मैं बाधा उत्पन्न न हो सरकार को इसका ध्यान रखना जरूरी है और उपनल कर्मियों की जायज मांगों पर विचार कर एक ठोस कदम उठाना चाहिए जिससे प्रदेश के शासकीय कार्यों की व्यवस्था भी बनी रहे और उपनल कर्मियों का भविष्य भी सुरक्षित बन सके। -

सीएम धामी ने 1486.75 लाख की 7 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को बेतालघाट, नैनीताल में शहीद खेमचन्द्र डोरबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने 1486.75 लाख की कुल 07 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिसमें 691.06 लाख की 6 योजनाओं का लोकार्पण एवं 795.69 लाख की 1 योजनाओं का शिलान्यास शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई घोषणाएं की। जिसमें सुयालबाड़ी ओडाखान मोटर मार्ग के मध्य से 4 कि.मी. लंबे छीनी मटेला मोटर मार्ग के निर्माण की स्वीकृति, सुयालबाड़ी ओडाखान मोटर मार्ग के मध्य से सुयालबाड़ी गांव की ओर 2.5 कि.मी लंबे मोटर मार्ग का निर्माण, छीयोड़ी सुयालखेत मोटर मार्ग के मध्य से चाफा गॉव तक 2 किमी. लंबे मोटर मार्ग का निर्माण, विकासखण्ड बेतालघाट एवं कोटाबाग के नोनिया विनायक मोटर मार्ग से बिडारी पोखरधार मोटर मार्ग का मिलान एवं चौड़ीकरण कर हॉटमिक्स का कार्य, बेतालघाट दुर्गापुरी माता के मंदिर को मानसखण्ड परियोजना के अन्तर्गत स्वीकृति, सूखा मल्ली चुलिया गोल्जयू देवता मैतू मुकोटी मंदिर को मानसखण्ड परियोजना के अन्तर्गत स्वीकृति प्रदान करने, भवाली रामनगर एवं भीमताल नगर पालिका क्षेत्र में सीवर एवं ड्रेनेज प्लान, लेटीबुंगा एवं भीमताल में मिनी स्टेडियम की स्वीकृति, रामनगर-बेतालघाट टू लेन सडक मार्ग की तथा महाविद्यालय बेतालघाट में आडिटोरियम के निर्माण कार्य करने घोषणा शामिल है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीद खेम चंद्र डॉरबी के माता-पिता को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने 11 महिलाओं को लखपति दीदी बनने, अमेल की सीएससी संचालिका पूजा रावत, कॉलेज के प्रधान सहायक दिनेश जोशी और हरतपा के सहायक अध्यापक प्रदीप बोरा को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि महज 20 साल की उम्र से ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले खेम चन्द्र जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादाई है। 50 राष्ट्रीय रायफल्स में तैनात खेम चन्द्र जी ने 2014 में जम्मू-कश्मीर में बाढ़ राहत कार्य के दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हें मरणोपरांत महामहिम राष्ट्रपति द्वारा वीरता पदक से सम्मानित किया गया। उन्होने कहा जब किसी मनुष्य में शिक्षा और संस्कार दोनों का विकास होता है, तभी वह परिवार, समाज और देश का विकास कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में युवा शक्ति के हितों का विशेष ख्याल रखते हुए युवा कल्याण, खेल-कूद, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा आदि पर 1700 करोड़ रूपए से अधिक खर्च करने का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा राज्य में बाहरी व्यक्तियों को आवंटित भूमि की भी जांच की जा रही है। भूमि जिस प्रयोजन के लिए ली गई है, उसका इस्तेमाल उसी प्रयोजन में हो इसकी जांच करवाई जा रही है। यदि उसका प्रयोग उसी प्रयोजन में नहीं मिलेगा तो भूमि सरकार में निहित की जाएगी। आगामी बजट सत्र तक भू कानून का कार्य भी पूर्ण हो जायेगा।
मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पण की गई योजनाओं में राजीव गांधी अभिनव विद्यालय बेतालघाट में 321.38 लाख से छात्रावास निर्माण, राजकीय आश्रम पद्धति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेतालघाट में 171.71 लाख से प्रथम तल पर छात्रावास एवं सीसी मार्ग का निर्माण एवं टाइप 2 के दो आवास और चहारदीवारी व दो पानी की टंकी व टॉयलेट्स का निर्माण, नैनीताल के सुनकिया में 75 लाख पेट्रोल डीजल रिफिलिंग सेंटर का निर्माण, राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज बेतालघाट में 61.50 एक एक भौतिक एवम जीव विज्ञान प्रयोगशाला निर्माण, राजकीय इंटर कॉलेज जीतूवापीपल में 61.50 लाख की लागत से प्रयोगशाला निर्माण कार्य शामिल है। मुख्यमंत्री द्वारा शिलान्यास की गई योजनाओं में 795.69 लाख की लागत से भीमताल बाईपास मोटर मार्ग के 1 से 3 किमी में डीवीएम एवम सीसी मार्ग सुधारीकरण और 150 मीटर नहर कवरिंग का कार्य शामिल है। इस अवसर पर नैनीताल सांसद अजय भट्ट, नैनीताल विधायक सरिता आर्य, दर्जा मंत्री दिनेश आर्य, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, प्राचार्य डॉ विनय विद्यालंकार, सीडीओ अशोक पांडे, एडीएम फिंचा राम चौहान, प्राधिकरण सचिव विजय नाथ शुक्ला, एसडीएम प्रमोद कुमार, विपिन पंत एवं अन्य लोग मौजूद रहे। -

डॉ. तुषार अग्रवाल की जटिल सर्जरी के बाद 30 वर्षीय महिला ने प्राकृतिक रूप से किया गर्भधारण
देहरादून। मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एक प्रेरणादायक कहानी साझा कर रहा है, जो अस्पताल की शानदार प्रजनन देखभाल सेवाओं को दिखाता है। 30 साल की एक महिला, जो कई मुश्किलों का सामना करने के बाद माँ बनने की कोशिश कर रही थी, अस्पताल में सर्जरी के बाद प्राकृतिक रूप से गर्भवती हुई है। पिछले 4-5 सालों में, महिला ने कई डॉक्टरों से सलाह ली थी, लेकिन सभी ने कहा कि उनकेगर्भवती होने की संभावना बहुत कम है। उनको फेलोपियन ट्यूब बंद होने, एंडोमेट्रियोसिस (गर्भाशय की अंदरूनी परत से जुड़ी समस्या) और फाइब्रॉएड (गाँठ) की समस्या थी। डॉक्टरों ने उन्हें टेस्ट ट्यूब बेबी या गर्भपात करने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से संपर्क किया, जहाँ डॉ. तुषार अग्रवाल ने उनका केस संभाला।
डॉ. तुषार ने सर्जरी के जरिए उनकी सभी समस्याओं का इलाज किया। उन्होंने एंडोमेट्रियोसिस के सिस्ट को हटाया, अंडाशय की क्षमता बढ़ाने के लिए पीआरपी (एक खास तरीका) का इस्तेमाल किया, और बंद फेलोपियन ट्यूब को साफ किया। सर्जरी के सिर्फ दो महीने बाद महिला ने प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर लिया।
आज वह आठ महीने की गर्भवती है और डॉ. तुषार की देखरेख में है। उन्होंने समय से पहले प्रसव के खतरे को सफलतापूर्वक पार कर लिया है और सामान्य डिलीवरी की उम्मीद है। महिला ने इस यात्रा को आशीर्वाद बताया है। डॉ. तुषार ने कहा, ष्यह मामला दिखाता है कि जटिल प्रजनन समस्याओं के इलाज में सही देखभाल और सर्जरी कितनी जरूरी है। एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याएं अब आम होती जा रही हैं, और हमारा उद्देश्य है कि हम मरीजों को उम्मीद और बेहतर इलाज के विकल्प दें। इस सफलता से पता चलता है कि नई सर्जरी तकनीकें कितनी असरदार हो सकती हैं। मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल उन महिलाओं को मदद और सही देखभाल देने के लिए पूरी तरह से समर्पित है, जो माँ बनने में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। डॉ. तुषार अग्रवाल एंडोमेट्रियोसिस सर्जरी, फाइब्रॉएड सर्जरी और सभी बांझपन मामलों के इलाज में बेहद अनुभवी हैं। -

राज्य बचाने के लिए संघर्ष समिति से जुड़े लोगः नरेंद्र सिंह नेगी
देहरादून। मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने संयोजक मोहित डिमरी के साथ उत्तराखंड की संस्कृति के ध्वजवाहक और हृदय सम्राट नरेन्द्र सिंह नेगी से उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर संघर्ष समिति ने स्वाभिमान आंदोलन की रणनीति को लेकर उनसे चर्चा की। समिति के पदाधिकारियों ने नेगी जी का आशीर्वाद लेते हुए उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हुए उनके दिखाए गए आदर्श एवं संघर्ष के रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराया। समिति ने कहा कि आपकी ही प्रेरणा से इस आंदोलन को बल मिल रहा है। आगे भी आपके आशीर्वाद से हम मूल निवास और सशक्त भू-कानून लागू होने तक इस आंदोलन को अनवरत जारी रखेंगे।
इस मौके पर उत्तराखंड के गौरव नरेंद्र सिंह नेगी ने उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की और संघर्ष समिति द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन की सराहना की। उन्होंने आंदोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए उत्तराखंड की जनता से संघर्ष समिति से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य बचाने के लिए मूल निवास 1950, मजबूत भू-कानून का लागू होना और स्थायी राजधानी गैरसैंण का बनना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य बनने के 24 वर्षों में भी जनता के आकांक्षाएं एवं सपने अधूरे हैं। राज्य बचाने और इसकी अवधारणा साकार करने के लिए जनता को संघर्ष का रास्ता अपनाना ही होगा। इस मौके पर संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी, महासचिव प्रांजल नौडियाल, कोर मेंबर पंकज उनियाल, कपिल रावत, आशीष नौटियाल, राकेश नेगी आदि मौजूद थे। -

राज्यपाल आईआईएम काशीपुर में उत्तराखण्ड सेल के स्थापना कार्यक्रम में शामिल हुए
देहरादून/काशीपुर। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने अपने एक दिवसीय जनपद भ्रमण के दौरान आईआईएम काशीपुर में आयोजित उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ (उत्तराखण्ड सेल) के स्थापना के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। राज्यपाल ने उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ (सेल) का फीता काटकर उद्घाटन किया उसके उपरांत राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज के इस सुअवसर पर जब एक महाभियान की शुरुआत ‘उत्तराखण्ड सेल’ की स्थापना हो रही है, राज्य के तेजी से विकास के लक्ष्य की पूर्ति के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में भाग लेने पर मुझे बहुत ही प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गुरु द्रोणाचार्य ने शिक्षा के लिए काशीपुर को चुना था ठीक उसी तरह भारत सरकार ने इस पावन भूमि को प्रबंध के क्षेत्र में ज्ञान की गंगा बहाने के लिए आईआईएम काशीपुर को स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य उत्तराखण्ड के लोगों की सोच में बदलाव लाकर प्रदेश को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाना है, उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि इस संस्थान ने तेरह वर्षों के दौरान निरंतर सफलता के पायदान चढ़े हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश के टॉप 20 संस्थानों में जगह बनाने वाले इस संस्थान के लिए, उत्तराखण्ड के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने का यह सही समय है। राज्यपाल ने कहा कि हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी गुरुओं का राज्य कल्याण के लिए योगदान का उल्लेख मिलता है। इसी तरह के योगदान के लिए आज का दिन हमारे राज्य के लिए यादगार दिन रहेगा, जब इस महाभियान की शुरुआत ‘उत्तराखण्ड सेल’ की स्थापना से हो रही है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘उत्तराखण्ड सेल’ उत्तराखण्ड राज्य एवं आईआईएम काशीपुर के लिए एक ‘थिंक टैंक’ का काम करेगी जो कि राज्य एवं संस्थान के बीच एक सेतु होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रबंधकीय उत्कृष्टता के लिए अपना योगदान देगी, जो सेतु का पूरक होगा। यह सेल उत्तराखण्ड सरकार को संस्थान के विभिन्न विशिष्ट क्षेत्रों के प्राध्यापकों, उत्कृष्टता केंद्रों एवं अन्य संसाधनों से समन्वय एवं सामंजस्य स्थापित करेगी।
राज्यपाल ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य उत्तराखण्ड सरकार के लिए योजना एवं कार्यक्रम को विकसित, आकलन एवं क्रियान्वयन में योगदान करना है। उन्होंने कहा कि भारत का मस्तक हिमालय, भगवान भोले शंकर का वास स्थान है। उन्होंने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हिमालय की गोद में देवभूमि उत्तराखण्ड स्थित है। भगवान शिव के त्रिशूल की तरह, तीन क्षेत्रों का योगदान उत्तराखण्ड के आर्थिक विकास में आवश्यक है। ये तीन क्षेत्र है टूरिज्म (पर्यटन), कृषि, (उद्यान) एवं तकनीक। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में तीन क्षेत्रों में विकास के कार्यों को लेकर राज्य के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों को आईआईएम काशीपुर के साथ काम करने के लिए एमओयू तैयार किया गया है।
राज्यपाल ने कहा कि आध्यात्मिक पर्यटन के लिए कुमाऊं यूनिवर्सिटी, उद्यान के लिए जीबी पंत यूनिवर्सिटी तथा तकनीकी के लिए उत्तराखण्ड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के साथ आईआईएम काशीपुर काम करेगा। उन्होंने कहा कि इन तीन क्षेत्रों में राज्य के समग्र विकास के लिए योजना तैयार की जाएगी एवं क्रियान्वयन के लिए उत्तराखण्ड सरकार के अधिकृत विभाग, संस्था एवं मंत्रालय को उत्तराखण्ड प्रशासन के नियमों के अनुसार सम्मिलित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी योजना उत्तराखण्ड के लोगों की सोच में बदलाव लाने के लिए अहम कदम है जिससे कि इस राज्य के हर एक नागरिक के मन में कुछ कर दिखाने की चाहत जाग्रत हो। जिसमें भारतीय प्रबंधन संस्थान काशीपुर का अहम रोल होगा।
राज्यपाल ने कहा कि देश और दुनिया के बदलते परिदृश्य में नई-नई चुनौतियां आती रहेंगी। एक विश्व स्तरीय प्रबंधन संस्थान विद्यार्थियों को उद्यमों से जुड़ी अनेक समस्याओं को सुलझाने के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा कि विश्व में हो रहे नए और सफल प्रयोगों से भी हमें सीखना चाहिए। हमें कैंपस के आस-पास उद्योग, व्यापार और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक इकोसिस्टम विकसित करना चाहिए जिससे हमारे देश के लिए विकसित राष्ट्र बनने का मार्ग सुगम हो। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि प्रदेश के शिक्षण संस्थान और उद्योग इस दिशा में मिलकर कार्य करेंगे और प्रदेश के समावेशी विकास में अपना योगदान देंगे। कार्यक्रम में कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रो. दीवान सिंह रावत, कुलपति उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय प्रो. ओंकार सिंह, कुलपति जीबी पंत विश्वविद्यालय प्रो. मनमोहन सिंह चौहान द्वारा प्रभारी निदेशक आईआईएम प्रो. सोमनाथ चक्रवर्ती के साथ एमओयू साइन किये गए, इसके उपरांत तीनों कुलपतियों द्वारा अपने विचार भी व्यक्त किए व राज्यपाल/कुलाधिपति का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर कुलपति उत्तराखण्ड टेक्निकल यूनिवर्सिटी प्रो. ओंकार सिंह, कुलपति कुमाऊं यूनिवर्सिटी दीवान सिंह रावत, कुलपति गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर प्रो. एम एस चौहान, बोर्ड मेंबर संदीप सिंह, एनके मिश्रा, निदेशक आईआईएम काशीपुर सोमनाथ चक्रवर्ती, एडीएम अशोक कुमार जोशी, अपर पुलिस अधीक्षक अभय कुमार सिंह, एसडीएम अभय प्रताप सिंह, गौरव चटवाल सहित शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। -

केदारघाटी के उत्पादों को केदार ब्रांड बनाकर सुधारेंगे मातृशक्ति की आजीविकाः सीएम
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि क्रीड़ा मैदान में लखपति दीदी अभियान-शक्ति को सम्मान कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि केदारघाटी के स्थानीय उत्पादों को देश- विदेश में केदार ब्रांड बनाकर तैयार कर विपणन किया जाएगा। मातृशक्ति की आजीविका सुधार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा वहीं घाटी के होम स्टे से लेकर अन्य सुविधाओं को भी इसके अंतर्गत पहचान दी जाएगी। केदारघाटी की धार्मिक पहचान के साथ राज्य सरकार घाटी को नई पहचान दिलाने के लिए इसके अंतर्गत कार्य करेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ विधानसभा की दिवंगत विधायक शैला रानी रावत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन पर मैंने इस विधानसभा की जिम्मेदारी बतौर उनका प्रतिनिधि लेने का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में लगातार क्षेत्र के विकास के लिए शासन- प्रशासन सहित वरिष्ठ मंत्री इसमें लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बीते दिनों 31 जुलाई को अतिवृष्टि के चलते भारी नुकसान हुआ, सड़कें और पैदल मार्ग बंद हो गए थे। यात्रा मार्ग पर फंसे विभिन्न स्थानों से करीब 15 हजार लोगों को रिकॉर्ड समय में मैनुअल एवं हैली से रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया। इसके अलावा 15 दिनों में पैदल मार्ग को सुचारू कर एक महीने के भीतर ही यात्रा को पूर्व जैसे भव्य स्वरूप में वापस लाया गया। उन्होंने स्थानीय जनता एवं केदार घाटी के लोगों को इस पूरे रेस्क्यू अभियान से लेकर यात्रा को दोबारा समय पर शुरू करवाने के लिए धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को नई पहचान दिलाने के लिए मातृशक्ति बड़ी अहम भूमिका निभा रही है। पूरे प्रदेश के अंदर सैकड़ों की संख्या में महिला स्वयं सहायता समूहों में जुड़ी हजारों महिलाएं वर्ड क्लास उत्पाद तैयार कर अपने समूह और राज्य को नई पहचान दिला रही हैं। लगातार उनकी आजीविका में सुधार हो रहा है। वहीं प्रदेश सरकार ने हाउस ऑफ हिमालयाज कम्पनी का गठन कर प्रदेश के उत्पादों की नई सिरे से ब्रांडिंग कर मातृशक्ति को मजबूत करने का काम किया जा रहा है। इन्हीं महिला समूहों द्वारा 110 आउटलेट चारधाम यात्रा मार्गों पर खोले गए हैं जिनसे उनकी आजीविका सुदृढ़ हो रही है। रुद्रप्रयाग जनपद में 4000 से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने में सफल रही हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और प्रदेशवासियों के हित में जल्द सख्त भू-कानून लागू होने जा रहा है। जिन लोगों ने अवैध रूप से जमीनों की खरीद फरोख्त की है उनसे जमीन वापस लेकर सरकारी भूमि में निहित की जाएगी। वहीं देश में सर्वप्रथम समान नागरिकता संहिता लागू करने वाला पहला प्रदेश भी उत्तराखण्ड बनने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केदारनाथ धाम एक था, एक है और एक ही रहेगा, देश में किसी भी स्थान पर उत्तराखंड के चार धामों के प्रयोग कर कोई मंदिर नही बनने दिया जाएगा।
इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा, जिला पंचायत अध्यक्ष अमरदेई शाह, विधायक रुद्रप्रयाग भरत सिंह चौधरी, राज्यमंत्री चंडी प्रसाद भट्ट, विधायक शक्ति लाल शाह, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा आशा नौटियाल, भाजपा जिलाध्यक्ष महावीर पंवार, प्रदेश महामंत्री भाजपा आदित्य कोठरी, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, आईजी करन नगन्याल, जिलाधिकारी सौरभ गहरवार, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी एवं भारी संख्या में मातृशक्ति एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।