देहरादून। वन्य जीव तस्करी मामले का खुलासा करते हुए एसटीएफ ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से गुलदार की दो खालें बरामद की गयी है। आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही की जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि बीते दिनो डब्ल्यूसीसीबी दिल्ली से उत्तराखण्ड एसटीएफ को सूचना मिली थी कि पुरोला उत्तरकाशी क्षेत्र में वन्य जीव जन्तुओं के अंगो तथा खाल की अवैध तस्करी हो रही है, जिसे उत्तराखण्ड एसटीएफ द्वारा अपने स्थानीय सूत्रों से डेवलप किया गया। जिस पर बुधवार को लीसा भण्डार पुरोला को जाने वाले रास्ते से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया ह।ै जिसने अपना नाम बृजमोहन पुत्र जनक सिंह निवसी पुरोला उत्तरकाशी बताया और जिसके कब्जे से 2 गुलदार की खाल जिनकी लम्बाई क्रमशः 6 फीट तथा 8 फीट लगभग पायी गयी है, बरामद की गयी है। बताया कि गुलदार को वन्यजीव जन्तु संरक्षण अधिनियम की पहली अनुसूची में रखा गया है। इसका शिकार करना एक गम्भीर अपराध है। पकड़े गये तस्कर के खिलाफ थाना पुरोला उत्तरकाशी में वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक एसटीएफ चन्द्रमोहन सिंह ने बताया कि आरोपी से पूछताछ में मिली जानकारी के अनुसार एसटीएफ द्वारा इस मामले मेें गहनता से छानबीन की जा रही है और यदि इस मामले में अन्य किसी व्यक्ति की संलिप्तता मिलती है तो उसके विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।
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गुलदार की दो खालों सहित वन्य जीव तस्कर गिरफ्तार
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भू कानून व मूल निवास पर उप नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा
रामनगर। इन दिनों पूरे प्रदेश में सशक्त भू कानून की मांग जोर पकड़ रही है। जिसको लेकर धामी सरकार अपनी प्रतिबद्धता जता रही है। वहीं उप नेता प्रतिपक्ष व विधायक भुवन कापड़ी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भूकानून व मूलनिवास के नाम पर लोगों को डराया और ब्लैकमेल किया जा रहा है। जिन लोगों ने यहां पर पहले इन्वेस्ट किया है, अब उन लोगों को ब्लैकमेल करने का कार्य भूकानून व मूल निवास के नाम पर किया जा रहा है। उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि इससे भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार व राज्य सरकार का दोहरा चरित्र सामने आता है। उप नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमारे उत्तराखंड के जल, जंगल जमीन व नदियों को बेच रही है। यह अपने चहेतों के लिए कर रहे है। उन्होंने कहा सरकार को अगर भूकानून इतना ही महत्वपूर्ण लग रहा है तो तत्काल इसको लेकर विधानसभा सत्र बुलाना चाहिए और इस पर चर्चा करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि भूकानून व मूल निवास के नाम पर जिन लोगों ने उत्तराखंड में पहले से निवेश किया है, उनको डरा धमकाकर वसूली करने के लिए भूकानून के नाम पर डराना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे अफरा तफरी का माहौल बन गया है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पूर्व में जमीन ली है पुराने कानून के हिसाब से लिया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार कुछ कर रही है और वह जनता के हित में है तो उसको धरातल पर लाएं और उससे लोगों को फायदा हो नुकसान नहीं।
बीते दिनों भूकानून पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहा था कि प्रदेश के अंदर लंबे समय से सख्त भूकानून की आवश्यकता थी, लोगों के द्वारा कई बार इसकी मांग की गई है ।उन्होंने कहा कि हम भी चाहते हैं कि प्रदेश के अंदर भूकानून सख्त होना चाहिए। अभी तक जो भू कानून लागू है जो प्रावधान किए गए हैं, भूमि की खरिद फरोख्त में उन प्रावधानों का जिन्होंने उल्लंघन किया है या उनका पालन नहीं किया है, जिस प्रायोजन से उन्होंने वह भूमि खरीदी गई है, अगर उस भूमि का उपयोग उस प्रायोजन में नहीं किया गया है तो ऐसी सभी प्रकार की भूमि का तत्काल जांच के आदेश कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में हम सख्त भू कानून लेकर आएंगे। आगामी विधानसभा सत्र में हम सख्त भूकानून लेकर आएंगे। -

विंटर गेम्स अधर में, स्कीइंग स्लोप खस्ता, बदहाल औली का मोटर मार्ग
देहरादून। उत्तराखंड में इस साल 20 जनवरी से 20 फरवरी के बीच में विंटर गेम्स आयोजित किए जा सकते हैं। उत्तराखंड विंटर गेम एसोसिएशन से मिली जानकारी के अनुसार इस बार उत्तराखंड में फेडरेशन ऑफ़ इंटरनेशनल स्की की चार रेस प्रस्तावित है। जिसमें से 2 रेस स्लैलम और 2 जायंट स्लैलम रेस आयोजित की जानी है। स्लालोम रेस की तुलना में जायंट स्लालोम रेस ज्यादा स्पीड और ज्यादा रोमांच भरी होती है। इसके अलावा नेशनल विंटर गेम्स के भी तीन इवेंट उत्तराखंड में प्रस्तावित है। इनमें अल्पाइन, स्नोबोर्ड, नॉर्डिक तीन इवेंट है, जो की होली में 20 जनवरी से 20 फरवरी के बीच में आयोजित करवाने के लिए प्रस्तावित है। लेकिन समस्या ये है कि विंटर गेम्स के लिए अभीतक तक तो औली तैयार नहीं है।
उत्तराखंड विंटर गेम एसोसिएशन के जॉइंट सेक्रेटरी अजय भट्ट ने बताया कि कश्मीर में होने जा रहे खेलो इंडिया के साथ ही नेशनल विंटर गेम्स की तरीखों की भी घोषणा हो जाएगा। इसी के साथ-साथ फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्की की रेस की तारीखों का भी ऐलान हो जाएगा। इसके बाद उत्तराखंड के औली में होने वाले विंटर गेम्स को लेकर वस्तु स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
अगर तैयारी की बात करें तो उन्होंने बताया कि औली में स्लोप खराब पड़ी है, जिसे रिपेयर करने की जरूरत है। इसके अलावा ग्लास हाउस, जहां बैठकर खिलाड़ी और दर्शन मैच का मजा लेगे, उसे भी मरम्मत की जरूरत है। इसके अलावा मौसम की कभी-कभी औली में बड़ी चुनौती बनाता है।
उत्तराखंड विंटर गेम्स एसोसिएशन का कहना है कि उत्तराखंड में लगातार बदलते मौसम के बीच में औली में विंटर गेम्स आयोजित भी कही चुनौती बन जाता है। खिलाड़ी और दर्शक समय से औली पहुंचे, इसके लिए जरूरी है कि हेलीकॉप्टर को गौचर की जगह सीधे में औली में लैंड कराया जाए। क्योंकि मोटर मार्ग से गौचर से औली जाने में बहुत अधिक समय लगाता है। इसके अलावा संगठन का कहना है कि जोशीमठ से औली तक की सड़क के भी बुरे हाल हैं। उसे भी ठीक किए जाने की जरूरत है। वही विंटर गेम्स के दौरान सड़क पूरी तरह से बर्फ से ढकी रहती है, जिसके लिए स्नो कटर की जरूरत होती है। उत्तराखंड विंटर गेम एसोसिएशन का कहना है कि उत्तराखंड में सफल विंटर गेम करवाने के लिए सरकार का सहयोग बेहद जरूरी है। -

डीएम ने डेंगू/मलेरिया जांच को एलिसा मशीन जिला चिकित्सालय को दी
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हेतु निरंतर प्रयासरत है, इसी के क्रम में आज जिला चिकित्सालय को डेंगू/मलेरिया जांच हेतु एलिसा मशीन जिला चिकित्सालय को दी तथा सीएमओ को 20 फागिंग मशीन एवं स्प्रे मशीन उपलब्ध कराई गई हैं। डीएम स्वयं चिकित्सालयों का औचक निरीक्षण कर चिकित्सालयों की व्यवस्था देख रहे हैं। साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी को जनपद अवस्थित चिकित्सालयों का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए हैं। जिसके क्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी देहरादून द्वारा जनपद अवस्थित चिकित्सालयों का निरीक्षण गतिमान है।
जिलाधिकारी ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बैठक के दौरान चिकित्सालयों में जो सुविधाएं बताई जा रही हैं, निरीक्षण के दौरान सभी चिकित्साल में उपलब्ध हों यह सुनिश्चित कर लिया जाए। यदि उपकरण एवं अन्य सुविधाओं की कमी है तो उसकी मांग कर ली जाए। -

एसडीआरएफ के तहत होने वाले सुरक्षात्मक कार्याे में समयबद्धता को प्राथमिकता देंः मुख्य सचिव राधा रतूडी
देहरादून। मुख्य सचिव राधा रतूडी ने एसडीआरएफ (राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि) के तहत होने वाले विभिन्न सुरक्षात्मक एवं पुनर्निर्माण कार्यों में उच्च गुणवत्ता के साथ समयबद्धता को प्राथमिकता देने की सख्त हिदायत दी है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अधिकारियों को एसडीआरएफ (राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि) के तहत होने वाले विभिन्न सुरक्षात्मक एवं पुर्ननिर्माण कार्यों में उच्च गुणवत्ता के साथ समयबद्धता को प्राथमिकता देने की सख्त हिदायत दी है।
सीएस श्रीमती रतूड़ी ने बाढ़ सुरक्षात्मक कार्याे के साथ ही नदियों के नियमित चौनलाइजेशन करने के निर्देश दिए हैं। जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में आबादी की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता पर रखने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कटाव स्थलों पर त्वरित कार्यवाही करने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों द्वारा जमीनी स्तर पर नियमित निरीक्षण के लिए भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के तहत क्षतिग्रस्त केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग के सुरक्षात्मक कार्यों, रूद्रप्रयाग में ऊखीमठ के बेडुला तिमली तोक व सरूणा गांवों की मधुगंगा नदी से कटाव सुरक्षा योजना, ऊखीमठ के पैज गांव की आवासीय बस्ती के समीप वैजकृकरोखी मोटर मार्ग पर भूकृधंसाव एवं भूकृस्खलन की रोकथाम हेतु सुरक्षा योजना, रा. ई. कालेज वैडा के समीप हो रहे। भूस्खलन एवं आकाश कामिनी नदी से कटाव सुरक्षा योजना, सीतापुर बाजार की पातीगाड एवं मन्दाकिनी नदी के दांये तट से कटाव सुरक्षा योजना, सोनप्रयाग में सोन नदी के बाएं तट पर बिजली घर पर बाढ़ सुरक्षा कार्यों, सोनप्रयाग में सोन व मन्दाकिनी नदी के संगम में डाउन स्ट्रीम में निर्मित योजनाओं के सुरक्षात्मक कार्यों, ऊखीमठ की मंगोली आवासीय बस्ती की कुपडा गदेरे से कटाव सुरक्षा योजना, उत्तरकाशी के बड़कोट के बनास गांव में आबादी के बचाव हेतु सुरक्षात्मक कार्यों, उधमसिंहनगर के सितारगंज में निर्मल नगर को बैगुल नदी की बाढ़ से बचाने हेतु बाढ़ सुरक्षा योजना जैसे विभिन्न प्रस्तावों पर अनुमोदन दिया। सचिवालय में राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के प्रस्तावों पर अनुमोदन हेतु मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में गठित राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में सचिव शैलेश बगौली, डा. आर राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन सहित लोक निर्माण विभाग व सिचाई विभाग के अधिकारी तथा जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग एवं उधमसिंहनगर मौजूद रहे। -

राज्यपाल ने गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब में टेका मत्था
देहरादून/चमोली। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बुधवार को चमोली में स्थित पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब पहुंचे। उन्होंने गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब में मत्था टेका और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। राज्यपाल के हेमकुंड साहिब पहुंचने पर हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, गुरुद्वारा प्रबंधक सेवा सिंह एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों ने राज्यपाल का स्वागत किया। इस दौरान राज्यपाल ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों से बातचीत की और हेमकुंड पहुंचे सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी। राज्यपाल ने कहा कि सच्चे बादशाह गुरु नानक देव जी ने हमको सरलता, नम्रता, करुणा, सेवा आदि का जो सबक सिखाया है वह बहुत ही अच्छा मार्गदर्शन है। उन्होंने कहा कि मुझे आज बहुत खुशी हो रही है कि आज गुरु के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है और यहां आकर मुझे सभी श्रद्धालुओं का जो स्नेह व आशीर्वाद मिला है उससे मैं अभिभूत हूं। राज्यपाल ने वापसी में घांघरिया गुरुद्वारे में भी मत्था टेका और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली के लिए कामना की।
हेमकुंड में हुए अवस्थापना विकास कार्यों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हेमकुंड आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा हेतु पैदल मार्ग और हेलीपैड बहुत अच्छा बना है। उन्होंने केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे निर्माण का शिलान्यास करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। कहा कि रोपवे बनने से आने वाले दिनों में हेमकुंड की यात्रा बेहद सुखद होगी। इस दौरान हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, गुरुद्वारा प्रबंधक सेवा सिंह, पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी नंदन कुमार, उप जिलाधिकारी चन्द्रशेखर वशिष्ठ सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। -

नीट काउंसलिंग में फर्जी प्रमाण पत्र धारकों के खिलाफ रीजनल पार्टी मुखर, मुकदमे दर्ज कराएगी
देहरादून। देहरादून के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि उत्तराखंड में फर्जी निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर उत्तराखंड के बेरोजगारों का हक मारने वाले अभ्यर्थियों तथा उनके अभिभावकों और फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ बाकायदा फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज कराएंगे। शिव प्रसाद सेमवाल ने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि फर्जी निवास और जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर काउंसलिंग में चयनित होने वाले सभी अभ्यर्थी खुद ही आवेदन वापस ले लें, अन्यथा उन सभी अभ्यर्थियो सहित उनके अभिभावकों और संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे।
शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड नीट .2024 स्टेट काउन्सलिंग में अन्य राज्यों के छात्र/छात्रांए फर्जी डोमिसाइल, ओबीसी व अनाथ प्रमाण पत्र बनवाकर उत्तराखण्ड राज्य के दुर्गम क्षेत्र मे निवास करने वाले पहाड़ी युवाओं की सीटें हथिया रहें हैं। बाहर से आकर युवा काउन्सलिंग के बीच में अपने कागजातों को अपडेट करवा रहे हैं, जिससे प्रदेश का युवा प्रभावित एवं हतोत्साहित हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की की काउंसलिंग के बीच में कागजातों को अपडेट करवाने की प्रकिया बन्द कराई जाए, साथ ही जमा करने वाले कागजात के निर्गत की तिथि नीट फार्म भरने के समय या उससे पूर्व की होनी चाहिए तभी सही चयन सम्भव हो पायेगा। शिवप्रसाद सेमवाल ने सरकार से मांग की कि ऐसी दर्जनों अनियमितताएं स्टेट नीट काउन्सलिंग मे है, जिनका निराकरण तृतीय कान्सलिंग से पूर्व करना अत्यन्त आवश्यक है, जिससे पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्र के प्रदेश के युवाओं अपनी सालों की कडी मेहनत के फलस्वरूप न्याय मिल सके और यह छात्र आगे चलकर बरबाद न हों। इसके लिए सभी परीक्षार्थी एवं अभिभावक गण आजीवन आपके ऋणी रहेगे। इस अवसर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोविंद बिजल्वाण, गौरव कोठारी, सिद्धांत सिंह बिष्ट, वंश चौधरी, अरविंद चौधरी, राखी नौडियाल, अमित कुमार, ममता चौधरी, देवांग पवार, नितिन कुमार, शैलजा नौटियाल, पंकज कुमार, श्याम सिंह आदि के साथ ही बड़ी संख्या में नीट काउंसलिंग के अभ्यर्थी और उनके अभिभावक भी मौजूद थे। -

जल स्रोतों में जल उपलब्धता के लिए स्प्रिंगशैड मैनेजमेन्ट प्लान के तहत होगा कार्यः महाराज
देहरादून। उत्तराखंड वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण हमारे वर्षा आधारित पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि, तापमान में बढ़ोत्तरी और पानी की उपलब्धता में कमी आई है। जिस कारण अधिकांश फसलों की उत्पादकता प्रभावित हुई है। उक्त बात प्रदेश के जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को जलागम विभाग द्वारा आईसीएफआरई, ऑडिटोरियम, एफआरआई केंपस में आयोजित उत्तराखंड जलवायु अनूकूल बारानी कृषि परियोजना कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में कही। इस कार्य के लिए उत्तराखंड का चुनाव करने पर उन्होंने भारत सरकार एवं विश्व बैंक का आभार भी व्यक्त किया।
जलागम मंत्री श्री महाराज ने कहा कि उत्तराखण्ड के चयनित सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों में पर्वतीय कृषि को लाभदायक तथा ग्रीन हाउस गैस न्यूनीकरण हेतु सक्षम बनाने के लिए शक्तिशाली उत्पादन प्रणाली विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी के तहत विश्व बैंक पोषित उत्तराखण्ड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना का जलागम विभाग द्वारा आज से संचालन प्रारम्भ किया जा रहा है। श्री महाराज ने कहा कि छः वर्षीय यह परियोजना चयनित 8 जनपदों में प्रारम्भ की जायेगी और इस परियोजना से 519 ग्राम पंचायतों की कुल 3.7 लाख जनसंख्या को लाभ मिलेगा। यह पहली ऐसी परियोजना है जो जलवायु परिवर्तन से कृषि क्षेत्र में हो रहे प्रभावों को कम करने हेतु विभिन्न जलवायु अनुकूल कृषि प्रणालियों को परियोजना क्षेत्र के तहत मॉडल रूप में विकसित करेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में जल स्रोत जन समुदाय की जीवन रेखा है। जलवायु परिवर्तन से प्रदेश में जो जल स्रोत सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन जल स्रोतों में जल उपलब्धता में वृद्धि एवं इनके सतत् प्रबन्धन हेतु स्प्रिंगशैड मैनेजमेन्ट प्लान की अवधारणा के अनुरूप कार्य किया जायेगा।
जलवायु अनुकूल व्यवसायिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से कृषकों की आय में वृद्धि होगी और परियोजना क्षेत्रों में विभिन्न कारणों से बंजर हो चुकी कृषि भूमि को पुनः उत्पादक बनाने हेतु विभिन्न वृक्ष प्रजातियों को भी रोपित किया जायेगा। जलागम मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हम सबका साथ सबका विकास के मूलभूत सिद्धांत पर कार्य कर रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारक है। भारत द्वारा वर्ष 1970 तक शून्य ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन का संकल्प लिया गया है। इस परियोजना की महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के ख्याति प्राप्त राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक संस्थान कंसोर्टियम पार्टनर्स के रूप में उत्तराखंड से जुड़ेंगे और इन संस्थाओं के वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई तकनीक का प्रयोग इस परियोजना के अंतर्गत किया जाएगा।
इस अवसर पर कैंट विधायक सविता कपूर, जलागम के मुख्य परियोजना निदेशक आनंद वर्धन, परियोजना निदेशक नीना ग्रेवाल, सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता जयपाल, विश्व बैंक टास्क टीम लीडर रंजन सामन्त्रे, पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक राजीव नाथ त्रिपाठी, डॉ. रेनू सिंह, डॉ. ए.के. नायक, प्रोफेसर सुमित सेन, डॉ. एम.के. वर्मा, प्रोफेसर शेखर मुद्दू, डॉ. लक्ष्मीकांत, डॉ. सुभाष शर्मा एवं डॉ ए.एस. नैन आदि अधिकारी मौजूद थे। -

निराश्रित बच्चों के आत्मनिर्भर भविष्य की नींव रख रहा महिला कल्याण विभाग
देहरादून। महिला कल्याण विभाग द्वारा संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में आयोजित एक विशिष्ट कार्यक्रम में निराश्रित और दिव्यांग बच्चों के हौसलों को नए पंख लगते हुए देखा गया। इस कार्यक्रम में ऐसे बच्चों ने हिस्सा लिया, जिन्हें परिवार ने दिव्यांगता या विपरीत परिस्थितियों के कारण परित्याग कर दिया था। मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वाली कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या (महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग) ने बच्चों के साथ संवाद किया और उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा से प्रेरणा प्राप्त की।
कार्यक्रम का उद्देश्य उन बच्चों का सम्मान करना था जो राजकीय या स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से पुनर्वासित हुए और आज आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। महिला कल्याण विभाग के निदेशक प्रशांत आर्य ने बताया कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकांश बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं या विभिन्न व्यावसायिक कोर्स (जैसे बी.टेक, बी.एस.सी, बी.बी.ए, जी.एन.एम, योगा में डिप्लोमा, ब्यूटीशियन कोर्स, कंप्यूटर कोर्स) कर रहे हैं। विभाग की योजनाओं के माध्यम से 104 किशोर-किशोरियों को अब तक पुनर्वासित किया जा चुका है।
कविता, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग है, 10 वर्ष की उम्र में बालिका निकेतन, देहरादून में आई थी। परिवार के परित्याग के बाद, कविता का पालन-पोषण संस्थान में हुआ और अब वह शिशु सदन में केयरटेकर के रूप में सम्मानजनक जीवन जी रही है। प्रीति, जो मानसिक रूप से आंशिक दिव्यांग है, को 12 वर्ष की उम्र में बालिका निकेतन, देहरादून में प्रवेश कराया गया था। आज वह बालिका निकेतन में केयरटेकर के रूप में कार्यरत है और बड़ी जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है। इन दोनों बच्चियों ने समाज द्वारा अस्वीकार किए जाने के बावजूद, अपने हौसले और मेहनत से एक सफल जीवन की ओर कदम बढ़ाया है।
संजनाः देहरादून बालिका निकेतन में रहने वाली संजना, हरिद्वार में पाई गई थी। उत्तराखंड सरकार द्वारा अनाथ बच्चों को क्षैतिज आरक्षण प्रदान करने से लाभान्वित होकर, संजना अब स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। रजनी गोस्वामीः अल्मोड़ा की रजनी, जो बालिका निकेतन में रहती थी, देव संस्कृति विद्यालय से एनीमेशन कोर्स करके अब आर्टिस्ट के रूप में कार्यरत है। रजनी ने हॉलीवुड प्रोजेक्ट ट्रांसफार्मर और छत्रशाल जैसी फ़िल्मों पर काम किया है। मीना सरनः हरिद्वार में पली-बढ़ी मीना, मडंेजमते पद क्मदजंस ैनतहमतल करके भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं। कार्यक्रम में बाल देखरेख संस्थाओं के माध्यम से पुनर्वासित कई अन्य बच्चों की सफलता की कहानियाँ भी साझा की गईं। इनमें पोक्सो पीड़ित और विधि विवादित किशोर भी शामिल थे, जो आज आत्मनिर्भर होकर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। इन बच्चों की पहचान गोपनीयता के तहत सुरक्षित रखी गई है। कार्यक्रम में निदेशक महिला कल्याण प्रशांत आर्य, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी मोहित चौधरी, उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी अंजना गुप्ता और राजीव नयन तिवारी की उपस्थिति रहे। -

बंजर खेतों को आबाद करने के संबंध में कृषि सचिव से मिले पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी
देहरादून। बाबा श्री विश्वनाथ जगदीशिला डोली रथ यात्रा के रजत जयंती वर्ष के वर्षभर के कार्यक्रम के तहत यात्रा संयोजक एवं पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने बंजर खेतों को आबाद करने हेतु कृषि सचिव एस. एन. पाण्डेय से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य में वर्तमान परिवेश को मध्य नजर रखते हुए यह महसूस हो रहा है कि गांवों से पलायन बड़ी तीव्रता से होता जा रहा है जिसके फलस्वरुप गांव वीरान तथा खेती बंजर होती जा रही है। इस संबंध में समिति बंजर खेतों को आबाद करने के संकल्प के साथ बंजर खेतों में जड़ी-बूटी, फल उत्पादन, कृषिकरण आदि का अभियान प्रारंभ कर चुकी है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने की योजनाओं की जानकारी एवं विभागीय अधिकारियों को कार्य योजना बनाकर और पूरे प्रदेश में जगह-जगह कृषि शिविर लगाकर किसानों को प्रशिक्षण देना चाहिए। समिति द्वारा भी आयोजित किए जाने वाले शिविरों में विभागीय अधिकारी अवश्य मौजूद रहें ताकि बंजर खेतों को आबाद करने के इस कृषि आंदोलन को सही दिशा मिल सके। इस अवसर पर निदेशक कृषि, निदेशक उद्यान, गोविंद पेटवाल, कमलापति मैठाणी, कैलाशपति मैठाणी आदि मौजूद रहे।