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2019 के भू संशोधन कानून ने बहुत बडे पैमाने पर भूमि विक्रय और अधिग्रहण को बढ़ावा दियाः नैथानी

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड धार्मिक सामाजिक विकास संगठन, दिल्ली (पंजीकृत) की स्थापना के 7 वर्ष पूरे होने पर तथा श्री विश्वनाथ जगदीशिला तीर्थाटन समिति उत्तराखंड के आह्वान पर अवंतिका, रोहिणी में उत्तराखंड के बंजर खेतों को आबाद करने पर एक परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड सरकार में पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के मार्गदर्शन में एवं वैद्य डा. मायाराम उनियाल की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता उत्तराखंड सरकार के पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने आगाह किया कि लगातार पलायन से खाली होते गांव और बंजर होते खेत आज उत्तराखंड के लिए खतरा बन गये हैं। साथ ही 2019 के भू संशोधन कानून ने बहुत बडे पैमाने पर भूमि विक्रय और अधिग्रहण को बढ़ावा दिया है जिससे निकट भविष्य में बंजर खेतों को सरकार द्वारा अधिग्रहीत करके विक्रय करने का अधिकार मिल जाएगा। इसलिए सभी प्रवासी उत्तराखंडी लोगों को जागरूक होकर अपनी जमीन को बंजर होने से बचाना होगा। उन्होंने अपील की कि सभी प्रवासी लोगों को साल में दो बार एक दो महीने अपने गांव जाकर अपने बंजर खेतों की देखभाल करनी चाहिए ताकि वे भविष्य में उससे वंचित न हो सकें। यदि पहाडों से पलायन जारी रहा तो भविष्य में परिसीमन होने पर विधानसभा में मैदानी सीटें बढ जाएंगी और फिर मुख्यमंत्री भी वहीं से होगा।
कार्यक्रम के अध्यक्ष आयुर्वेद रत्न, वैद्य डा. मायाराम उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड से राष्ट्रीय राजधानी, मुंबई और अन्य महानगरों सहित अन्य जगहों पर, जहां बड़ी संख्या में उत्तराखंडी रहते हैं, लोगों को एकजुट होकर अपने गांवों के उन मृत खेतों को पुनर्जीवित करने के लिए बीज बोएं जिन पर बड़े पैमाने पर झाड़ियाँ उग आई हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जलवायु के अनुकूल अलगदृअलग प्रकार की सैकड़ों ऐसी वनस्पतियां एवं जड़ीदृबूटियां हैं जिनको सुअर, बंदर आदि से भी खतरा नहीं है और जिनको एक बार लगाकर लाखों रुपए कीमत पर बेचा जा सकता है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक तथा देवभूमि उत्तराखंड धार्मिक सामाजिक संगठन,दिल्ली के अध्यक्ष नारायण दत्त लखेड़ा ने सभी उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने उत्तराखंड में बंजर खेतों को आबाद करने का जो आह्वान किया है ,वह बहुत सामयिक और महत्वपूर्ण है और इस पर गंभीरता से विचार करने तथा कार्य करने की जरूरत है।
प्रसिद्ध कुमाउनी- हिन्दी साहित्यकार पूरन चंद कांडपाल ने कहा कि उत्तराखंड में निरन्तर पलायन होने से गांव खाली हो रहे हैं इससे खेत बंजर हो रहे हैं। इस समस्या का समाधान हम सबको तथा उत्तराखंड सरकार को मिलकर करना होगा। गढ़वाली -हिन्दी के साहित्यकार रमेश चंद्र घिल्डियाल ने कहा कि उत्तराखंड से पलायन रोकने के लिए उत्तराखंड सरकार को भूमि सुधार तथा ग्रामीण उद्योग पर ध्यान देने की जरुरत है। तभी वहां रोजगार पैदा होंगे और पलायन रुकेगा तथा गांव फिर से आबाद होंगे और खेत बंजर नहीं रहेंगे।
वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड जर्नलिस्ट्स फोरम के अध्यक्ष सुनील नेगी ने मंत्री प्रसाद नैथानी की बात का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तराखंड में रोजगारों का सृजन करके तथा अपने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए बढते पलायन को रोकना होगा। इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। इस अवसर पर गढ़वाल हितैषिणी सभा के पूर्व अध्यक्ष गंभीर सिंह नेगी, राजेश्वर कंसवाल, रणजीत सिंह, कुंवर सिंह राणा, आशीष पंवार, कैलाशपति मैठाणी, प्रीतम मछखोली, रमेश चंद्र भट्ट, नन्दा बल्लभ शर्मा, राजेश्वर प्रसाद कंसवाल, मोहन सिंह कैंतुरा, दीपक लटवाल प्रहलाद धस्माना, माथुरादत ध्यानी जयप्रकाश थपलियाल, शूरवीर सिंह राणा, हरिदत्त जोशी, अव्वल सिंह आदि उपस्थित रहे।

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