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पंचतत्व मे विलीन हुये वेदपाठी मृत्युंजय हिरेमठ

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ के वेदपाटी मृत्युंजय हिरेमठ का ह्रदयघात से आकस्मिक निधन होने से पूरी केदारघाटी मे शोक की लहर है। उन्हें मंदाकिनी तट पर समाधि दी गयी। बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने केदारनाथ धाम में वेदपाठी का कार्य संभाल रहे मृत्युंजय हिरेमठ के आकस्मिक निधन पर शोक-संवेदना जतायी। कहा कि यह मंदिर समिति को अपूर्णीय क्षति हुई है। मृत्युंजय हिरेमठ ने हमेशा निष्ठा एवं सेवा भाव से कार्य किया तथा सोशल मीडिया में उनके शिव भक्ति स्त्रोत, भजन तथा लय पूर्ण गायन लोकप्रिय रहे।
दक्षिण भारत के जंगम शैव समुदाय से तालुक रखने वाले मृत्युंजय हिरेमठ अविवाहित थे और उनका परिवार अब स्थायी रूप से ऊखीमठ में ही निवास करता है। उनके पिता गुरुलिंग भी केदारनाथ धाम के पुजारी के रूप में  सेवा दे चुके हैं। उनके बड़े भाई शिवशंकर लिंग मंदिर समिति केदारनाथ प्रतिष्ठान में पुजारी के पद पर हैं। मृत्युंजय हिरेमठ शिव स्त्रोतम् सहित, भगवान भोले नाथ के भजनों का लय वद्ध गायन करते थे और सोशल मीडिया में उनके भजनों को काफी प्रशंसा भी मिली। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया कि मृत्युंजय हिरेमठ के निधन की खबर मिलने पर मंदिर समिति के ऊखीमठ, जोशीमठ, देहरादून सहित सभी कार्यालयों, विश्रामगृहों में शोक सभा आयोजित की गयी। दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार, सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, बीकेटीसी मुख्यकार्याधिकारी योगेंद्र सिंह, विशेष कार्याधिकारी रमेश सिंह रावत, मुख्य वित्त नियंत्रक आनंद सिंह, कार्याधिकारी आरसी तिवारी, अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी, राज्यमंत्री चंडी प्रसाद भटट, विधायक शैलारानी रावत, पूर्व विधायक आशा नौटियाल सहित सभी अधिकारियों कर्मचारियों ने वेदपाठी हिरेमठ के निधन पर शोक संवेदना जताई है।

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